खजुरी पाण्डु,आवास सूची में गरीबों के नाम कटने का आरोप, पंचायत में आक्रोश
पंचायत समिति रामकुमार पासवान ने उठाया सूची को पुनः जांच की मांग
आवास सूची में गरीबों के नाम कटने का आरोप, पंचायत में आक्रो
नबीनगर :-प्रखंड के खजुरी पाण्डु पंचायत मे नाम जोड़ने के नाम पर 1500 से 2000 रुपये लेने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप, अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल होने का भी दावा; पूरे मामले की जांच की मांग
नवीनगर प्रखंड। खजुरी पाण्डु पंचायत में आवास योजना की सूची को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि आवास सूची तैयार करने के दौरान गरीब, असहाय और जरूरतमंद परिवारों के नाम काट दिए गए हैं, जबकि ऐसे लोगों के नाम सूची में शामिल कर दिए गए हैं, जिनके पास पहले से पक्का मकान, वाहन और अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पंचायतवासियों का आरोप है कि आवास योजना की सूची में नाम जोड़ने के नाम पर कुछ लोगों से कथित तौर पर पंचायत के चमचा के द्वारा 1500 से 2000 रुपये तक की राशि ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि पैसा देने के बावजूद कई लोगों के नाम अंतिम सूची में नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि नाम जोड़ने के नाम पर पैसे लिए गए थे, तो आखिर उनका नाम सूची में क्यों नहीं आया और कथित तौर पर वसूली गई राशि का क्या हुआ।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत क्षेत्र में कुछ बिचौलियों की भूमिका संदिग्ध है। उनका कहना है कि आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर गरीब परिवारों से पैसे लिए जाने की बात सामने आ रही है। किसकी मिली भगत से पंचायत में पैसा का वही किया गया ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन इस पूरे मामले की जांच करे और यह पता लगाए कि कहीं किसी व्यक्ति या बिचौलिये द्वारा लाभुकों से अवैध रूप से राशि तो नहीं ली गई।
गरीबों के नाम हटाने का आरोप
खजुरी पाण्डु पंचायत के पंचायत समिति सदस्य राम कुमार पासवान ने भी आवास सूची को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सूची में ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जिनके पास पहले से पक्का मकान है और घर में गाड़ी तक है। इसके विपरीत, कई गरीब और असहाय परिवार, जिन्हें वास्तव में आवास की आवश्यकता है, उनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
राम कुमार पासवान पंचायत समिति ने कहा कि आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है। यदि सूची में पहले से पक्का मकान रखने वाले लोगों का नाम शामिल हुआ है और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को सूची से बाहर कर दिया गया है, तो यह गंभीर जांच का विषय है।
उन्होंने मांग की कि पंचायत में आवास योजना से संबंधित पूरी सूची की दोबारा जांच कराई जाए। साथ ही, लाभुकों के घरों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन परिवार वास्तव में आवास योजना के लिए पात्र है और कौन नहीं।
पैसे लेने के आरोप की भी जांच की मांग
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सबसे गंभीर आरोपों में नाम जोड़ने के नाम पर 1500 से 2000 रुपये तक लिए जाने की बात शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति से आवास सूची में नाम जोड़ने या आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पैसे लिए गए हैं, तो इसकी जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों का सवाल है कि बिचौलियों ने कथित तौर पर गरीबों से पैसा क्यों लिया और यदि पैसा लिया गया तो उसका सूची से नाम किसके ईसारे पर काटा गया । ग्रामीण यह भी चाहते हैं कि प्रशासन शिकायत करने वाले लाभुकों के बयान दर्ज करे और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ करे।
हालांकि, पैसे लेने और सूची में हेरफेर के आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पात्रता की जांच और सूची सार्वजनिक करने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत में आवास योजना से संबंधित लाभुकों की सूची सार्वजनिक की जाए और सूची में शामिल प्रत्येक लाभुक की पात्रता की जांच की जाए। इसके लिए लाभुकों के आवास, परिवार की स्थिति और योजना के निर्धारित मानकों के आधार पर सत्यापन कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास पहले से पक्का मकान है और वह योजना के निर्धारित मानकों के तहत पात्र नहीं है, तो उसका नाम सूची में आने की वजह स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं, जिन गरीब परिवारों के पास रहने के लिए उचित पक्का मकान नहीं है, उनके नाम सूची से हटाए जाने की स्थिति में उन्हें कारण बताया जाना चाहिए।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
मामले को लेकर पंचायत में उठ रहे सवालों के बीच अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर है। ग्रामीण चाहते हैं कि आवास योजना की सूची तैयार करने से लेकर लाभुकों के सत्यापन तक की पूरी प्रक्रिया की जांच हो। साथ ही, नाम जोड़ने के नाम पर कथित रूप से पैसे लिए जाने के आरोप की भी अलग से जांच की जाए।
यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता, गलत तरीके से लाभुकों का चयन या अवैध राशि लेने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी ग्रामीणों ने की है। दूसरी ओर, जिन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनका पक्ष सामने आना भी जांच की निष्पक्षता के लिए जरूरी होगा।
फिलहाल, खजुरी पाण्डु पंचायत में आवास सूची को लेकर उठे विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गरीब परिवारों के नाम कथित तौर पर कटने, अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल होने और नाम जोड़ने के नाम पर 1500 से 2000 रुपये लिए जाने के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आएगी। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक पात्र लाभुकों को आवास योजना का लाभ दिलाने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है।



