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औरंगाबाद में NH-139 को “मौत का कुंआ” से मुक्ति दिलाने को बना ‘NH-139 फोर-लेन संघर्ष समिति’।

औरंगाबाद में NH-139 को “मौत का कुंआ” से मुक्ति दिलाने को बना ‘NH-139 फोर-लेन संघर्ष समिति’

8 जून को जिला परिषद कार्यालय के सामने एक दिवसीय धरना, डीएम को सौंपा ज्ञापन,
दोमुंहान पुल क्षतिग्रस्त, 18 दिन बाद भी डाइवर्जन नहीं बना – 10 घंटे का जाम।

राष्ट्रीय राजमार्ग NH-139 (औरंगाबाद-पटना) को 4-लेन बनाने और दोमुंहान पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद सरकारी उदासीनता को देखते हुए “NH-139 फोर-लेन संघर्ष समिति” का गठन किया गया है। समिति में सभी राजनैतिक दल, सामाजिक संगठन और आम जनता जुड़कर NH-139 को फोर-लेन बनाने के लिए जन आंदोलन खड़ा करेगी।

*1. डीएम को सौंपा ज्ञापन, धरने की अनुमति:*

समिति के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आज औरंगाबाद जिलाधिकारी को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामानुज पांडेय, राजद के प्रदेश महासचिव एवं जिला परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि ई. सुबोध कुमार सिंह, जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह, प्रदेश कांग्रेस नेता चुलबुल सिंह, जिला परिषद सदस्य शंकर यादवेंदु, सीपीआई नेता सिनेश राही, पृथ्वीराज चौहान ट्रस्ट के सचिव स्वर्णजीत सिंह शामिल थे।

*मुख्य मांगें:*
1. NH-139 को फोर-लेन बनाया जाए।
2. दोमुंहान पुल के क्षतिग्रस्त होने से तत्काल डाइवर्जन/वैकल्पिक पुल बनाया जाए।

इसके साथ समिति ने सदर अनुमंडल पदाधिकारी संतन कुमार सिंह से मिलकर 08 जून, सोमवार को प्रातः 10:00 बजे से जिला परिषद कार्यालय के सामने एक दिवसीय धरना के लिए स्वीकृति प्राप्त की है।

*2. क्यों जरूरी है फोर-लेन:*
समिति सदस्य रामानुज पांडेय ने कहा कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को NH-139 से होने वाली दीर्घकालिक व अल्पकालिक परेशानियों से अवगत कराना और जल्द निदान निकालना समिति का मुख्य उद्देश्य है।

उन्होंने बताया कि NHAI के मार्च 2025 के नए दिशानिर्देश के अनुसार किसी सड़क पर प्रतिदिन 12,000 वाहन चलें तो 2-लेन को 4-लेन बनाने का नियम है। NH-139 पर आज एक दिन में 40,000+ गाड़ियों का आवागमन है।

*IRAD (Integrated Road Accident Database) के अनुसार NH-139 पर औरंगाबाद जिले में ही औसतन 200+ लोग प्रति वर्ष मर रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में 2,500 मौतें औरंगाबाद की सड़कों पर हुई हैं। अरवल, ओबरा, दाउदनगर, औरंगाबाद और अंबा में बाईपास से मौत का यह सिलसिला नहीं थमेगा। बाईपास निर्माण NH-139 का दूरगामी समाधान नहीं है।

*3. दोमुंहान पुल: 18 दिन बाद भी डाइवर्जन नहीं*

16 मई को दोमुंहान पुल में दरार/क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई थी। 18 दिन बाद भी डाइवर्जन नहीं बनने से अंबा से बालूगंज-देव होते हुए औरंगाबाद तथा नबीनगर से सुन्दरगंज होते हुए औरंगाबाद आने वाले वाहनों के कारण 10-10 घंटे का जाम लग रहा है। ग्रामीण सड़कें और पुल-पुलिया बर्बाद हो रहे हैं।

समिति ने कहा कि “राजनैतिक सुस्ती और प्रशासनिक लापरवाही” इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। 18 दिन बाद भी दोमुंहान पर डाइवर्जन बनाने की प्रक्रिया शुरू न होने से आम लोगों और व्यापारियों के लिए बड़ी मुसीबत है।

*4. आगे का आंदोलन:*
समिति ने कहा कि NH-139 को फोर-लेन और दोमुंहान पर अतिशीघ्र डाइवर्जन निर्माण हेतु 8 जून को धरना और आगे चरणबद्ध आंदोलन ही एकमात्र विकल्प है। समिति ने औरंगाबाद के आमजनों, बुद्धिजीवियों और सभी दलों/विचारधारा से जुड़े लोगों से आंदोलन को सफल बनाने में सहभागिता की अपील की है।

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